Order Summary
Department of Revenue,Registration and Land Reforms
Government of Jharkhand
Revenue Case Monitoring System
Financial Year : 2017
Admission DateOrder DateCourt NameCase Number
01-03-201711-04-2025LRDC Pakur01

Order Summary:

न्यायालय भूमि सुधार उप-समाहत्र्ता, पाकुड़ दाखिल खारिज अपील वाद सं0-01/2017-2018 सुभाष चन्द्र शील बनाम हराधन मंडल एवं अन्य आदेश यह अपीलवाद अपीलकत्र्ता सुभाष चन्द्र शील, पिता-स्व0 बगला प्रसाद शील, सा0-सुन्दरपुर, थाना-हिरणपुर, जिला-पाकुड़ (झारखण्ड) के द्वारा अंचल अधिकारी, हिरणपुर के दाखिल-खारिज वाद सं0-118/2014-15 में दिनांक-07.11.2014 को पारित आदेश के विरूद्ध (1) हराधन मंडल (2) मंसाराम मंडल दोनों का पिता-बिफल मंडल, सा0-लाबरी, थाना-बरहैत, सा0-तोड़ाई, थाना-हिरणपुर को पक्षकार बनाते हुए दाखिल किया गया है। उभय पक्ष द्वारा दाखिल कागजातों एवं दलीलों के आधार पर मामला संक्षेप में यह है कि हिरणपुर अंचल के मौजा-तोड़ाई सं0-96 के खाता सं0-07 के दाग सं0-298 अन्तर्गत रकवा-06बी0-01क0-12धूर भूमि (प्रश्नगत भूमि) का नामांतरण अपने नाम से करने हेतु हराधन मंडल एवं मनसाराम मंडल (इस वाद के उत्तरवादी सं0-01 एवं 02) के द्वारा अंचल कार्यालय, हिरणपुर में आवेदन दिया गया। जिसके आधार पर अंचल अधिकारी द्वारा नामांतरण वाद सं0-118/2014-15 प्रारम्भ करते हुए दिनांक-07.11.2014 को पारित आदेश द्वारा प्रश्नगत भूमि का नामांतरण हराधन मंडल एवं मनसाराम मंडल (उत्तरवादीगण) के पक्ष में किया गया। यह अपीलवाद अंचल अधिकारी, हिरणपुर द्वारा पारित इसी आदेश के विरूद्ध दायर किया गया है। दिनांक-11.01.2025 को उभय पक्ष के विज्ञ अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत बहस को विस्तार से सुना गया। अपीलकत्र्ता के विज्ञ अधिवक्ता का कहना है कि हिरणपुर अंचल के मौजा-तोड़ाई सं0-96 के खाता सं0-07 के दाग सं0-298 अन्तर्गत रकवा-06बी0-01क0-12धूर प्रश्नगत भूमि राजस्व पंजी-।। में बगला प्रसाद शील, पिता-स्व0 काली प्रसाद शील के नाम से दर्ज है। पंजी-।। रैयत बगला प्रसाद शील की मृत्यु के बाद उनके पुत्र सुभाष चन्द्र शील (अपीलकत्र्ता) को प्रश्नगत भूमि पारिवारिक व्यवस्था के तहत प्राप्त हुई। उत्तरवादीगण को प्रश्नगत भूमि बंटाईदारी के रूप में दी गई थी तथा उनके द्वारा फसल का हिस्सा दिया जाता था। परन्तु अचानक उत्तरवादीगण द्वारा एक फर्जी निबंधित केवाला के आधार पर प्रश्नगत भूमि पर अपना दावा किया जाने लगा। उत्तरवादीगण का उक्त दावा बिल्कुल गलत है, क्योंकि अपीलकत्र्ता के पिता के द्वारा कभी भी उक्त सम्पत्ति किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन काल में विक्रय नहीं किया गया था। तथाकथित विक्रय केवाला फर्जी है एवं उसमें बगला प्रसाद शील के हस्ताक्षर के पूर्व ैकध्. लिखा हुआ है। त्महपेजतंजपवद ।बज में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि हस्ताक्षर से पूर्व ैकध्. लिखना है। उनका आगे कहना है कि जब उत्तरवादीगण द्वारा प्रश्नगत भूमि का क्रय वर्ष-1979 में ही किया गया था तो इतने लंबे समय बाद वर्ष-2014 में क्यों दाखिल-खारिज कराया गया। दाखिल-खारिज करने में अंचल अधिकारी, हिरणपुर द्वारा ज्ीम ठपींत ज्मदंदजे भ्वसकपदह ;डंपदजमदंदबम व ित्मबवतकद्ध ।बज 1973 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया। फर्जी निबंधित केवाला के आधार पर नामान्तरण की कार्यवाही की गई। न तो 16 आना रैयतों को आम सूचना निर्गत किया गया और न ही भूमि से जुड़े अन्य व्यक्तियों (पंजी-।। रैयत या उनके वारिसान) को नोटिस निर्गत किया गया जबकि ।बज की धारा-14 (2) में इसका स्पष्ट प्रावधान है। दाखिल-खारिज हेतु दाखिल आवेदन में नियमानुसार 1.45/- रूपये का स्टांप नहीं लगाया गया। परन्तु फिर भी उक्त आवेदन को अस्वीकृत नहीं किया गया। उत्तरवादीगण का प्रश्नगत भूमि पर कभी भी दखल कब्जा नहीं रहा है, फिर भी बिना दखल-कब्जा के ही नामान्तरण स्वीकृत किया गया। निम्न न्यायालय के अभिलेख में कई त्रुटियाँ है। अंचल निरीक्षक, हल्का कर्मचारी से प्रतिवेदन की मांग 29.10.2014 को पारित आदेश द्वारा किया गया जबकि प्रतिवेदन में अंचल निरीक्षक का हस्ताक्षर 03.10.2014 का है। अर्थात प्रतिवेदन मांगने से पूर्व ही प्रतिवेदन समर्पित कर दिया गया। विक्रय केवाला में जमाबन्दी सं0-42/427 अंकित है परन्तु इसे बदलकर दाखिल-खारिज आदेश में जमाबन्दी सं0-07 कर दिया गया है। अपीलकत्र्ता द्वारा नामान्तरण वाद प्रारम्भ होने के पूर्व 24.05.2014 को प्रश्नगत भूमि का नामान्तरण नहीं करने हेतु आवेदन दिया गया था। परन्तु उन्हें आश्वासन देने के बावजूद आपत्ति हेतु सूचित नहीं किया गया। 16 आना रैयत को निर्गत नोटिस मौजा-तोड़ाई को नहीं होकर मौजा-लाउरी, थाना-बरहेट को निर्गत किया गया। नियमतः नोटिस तामिला हेतु पन्द्रह दिनों का समय दिया जाना है, परन्तु प्रश्नगत मामले में दिनांक 03.11.2014 को नोटिस निर्गत करने का आदेश दिया जाता है तथा अगली तिथि तीन दिन बाद दिनांक-07.11.2014 निर्धारित की जाती है एवं उसी दिन आदेश पारित कर दिया जाता है। पूरी नामान्तरण प्रक्रिया केवल दस दिनों में पूरी कर ली गई जो निर्धारित प्रावधान का उल्लंघन है। उनका आगे कहना है कि जब तथाकथित फर्जी केवाला का निष्पादन हुआ था तो उत्तरवादीगण की उम्र 5-7 वर्ष रही होगी। इतने कम उम्र्र में उत्तरवादीगण द्वारा निबंधन कार्यालय आकर रूपये का भुगतान कर अपने नाम से निबंधन करा लिया गया, जो अत्यंत संदेहास्पद है एवं उक्त केवाला के फर्जी होने का सबुत है। उनके द्वारा अपील आवेदन स्वीकृत करते हुए निम्न न्यायालय के आदेश को निरस्त (ैमज ंेपकम) करने का अनुरोध किया गया। च्ंतंहतंची उत्तरवादीगण के विज्ञ अधिवक्ता का कहना है कि प्रश्नगत भूमि के पंजी-।। रैयत बगला प्रसाद शील थे। पंजी-।। रैयत बगला प्रसाद शील द्वारा निबंधित विक्रय केवाला सं0-1200, 1201, 1202 एवं 1203, दिनांक-24.03.1979 के द्वारा उत्तरवादीगण को प्रश्नगत भूमि बेच दिया गया। क्रय करने के बाद से ही प्रश्नगत भूमि पर उत्तरवादीगण का शांतिपूर्ण एवं लगातार दखल-कब्जा रहा है। यह अपील वाद माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय जो ठठब्श्र 1989 च्ंहम 252 में दर्ज है के अनुसार ठंततमक इल स्पउपजंजपवद है तथा चलने योग्य नहीं है। उत्तरवादीगण थाना-बरहेट, जिला-साहेबगंज के निवासी है जो प्रश्नगत मौजा-तोड़ाई से चालीस किलोमीटर की दूरी पर है। अतः अपीलकत्र्ता का यह दावा की उत्तरवादीगण बंटाईदार थे, बिल्कुल गलत है। प्रश्नगत भूमि का क्रय 1979 में ही किया गया एवं तब से उत्तरवादीगण का भोग-दखल रहा है। इस तथ्य को अपीलकत्र्ता के पिता एवं अपीलकत्र्ता जानते थे, परन्तु बाद में लालच में आकर प्रश्नगत भूमि पर झुठा दावा किया जा रहा है। उक्त भूमि पर एकरारनामा के तहत पेट्रोल पम्प भी चल रहा है। जो स्पष्ट करता है कि प्रश्नगत भूमि पर उत्तरवादीगण का भोग दखल है। उनका आगे कहना है कि नामान्तरण के दौरान सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है एवं कोई त्रुटि नहीं है। 16 आना रैयतों को नोटिस निर्गत किया गया है, जिसमें तोड़ाई पंचायत के मुखिया का भी हस्ताक्षर है। अपीलकत्र्ता द्वारा निबंधित केवाला को फर्जी बताया जा रहा है, जिसपर निर्णय लेना राजस्व न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नहीं है। उनका आगे कहना है कि अपीलकत्र्तागण द्वारा इस तथ्य को छुपाया जा रहा है कि उनके द्वारा माननीय ैनइ.व्तकपदंजम श्रनकहमए ;ैमदपवत क्मअपेपवदद्ध.प् पाकुड़ के न्यायालय में क्मबसंतंजपवद ंदक ब्ंदबमससंजपवद व िजीम तमहपेजमतमक ेंसम कममक छवण्.1200ए 1201ए 1202ए 1203, दिनांक-24.03.1979 तथा त्मबवअमतल व िच्वेेमेेपवद हेतु ैनपज दाखिल किया गया है। उक्त ैनपज से स्पष्ट है कि प्रश्नगत भूमि पर अपीलकत्र्ता का कोई दखल-कब्जा नहीं है। जब प्रश्नगत भूमि को लेकर ैनपज विचाराधीन है, तो ऐसी स्थिति में अपील अस्वीकृत कर दिया जाना चाहिए। अंचल अधिकारी, हिरणपुर के पत्रांक-111/रा0, दिनांक-02.03.2024 द्वारा अनुमण्डल दण्डाधिकारी, पाकुड़ के न्यायालय के क्रि0मिस0 वाद सं0-219/2022 में प्रेषित जाँच प्रतिवेदन में भी प्रश्नगत भूमि पर विपक्षीगण को दखल-भोग प्रतिवेदित किया गया है। उनके द्वारा अपील आवेदन अस्वीकृत करते हुए निम्न न्यायालय के आदेश को बरकरार रखने का अनुरोध किया गया। संपूर्ण अभिलेख का अवलोकन एवं अध्ययन किया गया। अपीलकत्र्ता द्वारा इस बात पर काफी जोर दिया गया है कि प्रश्नगत निबंधित केवाला फर्जी है। परन्तु इस संदर्भ में किसी भी तरह का निर्णय पारित करना इस न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नहीं है। प्रश्नगत निबंधित केवाला तब तक प्रभावी है, जबतक कि किसी सक्षम व्यवहार न्यायालय द्वारा उसे रद्द नहीं कर दिया जाता है। उत्तरवादीगण द्वारा दाखिल कागजातों से स्पष्ट होता है कि अपीलकत्र्ता द्वारा प्रश्नगत निबंधित केवाला को रद्द करने एवं दखल-कब्जा के त्मबवअमतल हेतु ैनपज दाखिल किया गया है। निम्न न्यायालय के अभिलेख का अवलोकन एवं अध्ययन किया गया। निम्न न्यायालय द्वारा नामान्तरण की कार्यवाही दिनांक-29.10.2014 को प्रारम्भ की गई एवं दिनांक-07.11.2014 को अंतिम रूप से आदेश पारित कर दिया गया। अर्थात पूरी नामान्तरण की प्रक्रिया केवल दस दिनों में पूरी कर ली गई। अंचल निरीक्षक के जाँच प्रतिवेदन में 03.10.2014 की तिथि अंकित है, जो अभिलेख प्रारम्भ करने की तिथि से पूर्व की तिथि है। 16 आना रैयत को नोटिस तो निर्गत किया गया, परन्तु प्रश्नगत भूमि जिस मौजा में अवस्थित है उस मौजा में नहीं कर लावरी, थाना-बरहेट को किया गया, जिसमें जिला-साहेबगंज न लिखकर, पाकुड़ लिखा गया। पंजी-।। रैयत अथवा उनके जीवित वंशज/वंशजों को कोई नोटिस निर्गत नहीं किया गया जो ज्ीम ठपींत ज्मदंदजे भ्वसकपदह ;डंपदजमदंदबम व ित्मबवतकद्ध ।बज 1973 की धारा-14 (2) का खुला उल्लंघन है। उक्त धारा निम्नवत है:-  ैमबजपवद 14 ;2द्ध ज्ीम ।दबींस ।कीपांतप ेींसस पेेनम ं हमदमतंस दवजपबम ंदक ंसेव हपअम दवजपबम जव जीम चंतजपमे बवदबमतदमक जव पिसम वइरमबजपवदए प िंदलए ूपजीपद पिजिममद कंले व िजीम पेेनम व िजीम दवजपबमण् व्द तमबमपचज व िवइरमबजपवदए प िंदलए जीम ।दबींस ।कीपांतप ेींसस हपअम तमंेवदंइसम वचचवतजनदपजल जव जीम चंतजपमे बवदबमतदमक जव ंककनबम मअपकमदबमए प िंदलए ंदक व िइमपदह ीमंतक ंदक कपेचवेम व िजीम वइरमबजपवद ंदक चंेे ेनबी वतकमते ंे उंल इम कममउमक दमबमेेंतलण् उक्त धारा से स्पष्ट है कि कम से कम 15 दिनों का समय लेकर आम सूचना के साथ-साथ अन्य संबंधित पक्षकारों को भी नोटिस निर्गत किया जाना है। स्पष्टतः निम्न न्यायालय द्वारा मनमाने तरीके से नामान्तरण की कार्रवाई गई है। उपर्युक्त विवेचना के आधार पर वाद के मेरिट पर नहीं जाते हुए अपील आवेदन स्वीकृत किया जाता है एवं निम्न न्यायालय द्वारा पारित आदेश को निरस्त (ैमज.ंेपकम) किया जाता है। साथ ही यह वाद इस आदेश के साथ रिमाण्ड किया जाता है कि ज्ीम ठपींत ज्मदंदजे भ्वसकपदह ;डंपदजमदंदबम व ित्मबवतकद्ध ।बज 1973 की धारा-14 (2) का अक्षरशः पालन करते हुए विधिवत 16 आना रैयतों को आम सूचना एवं इस वाद के अपीलकत्र्ता को नोटिस निर्गत कर, सुनवाई का पर्याप्त अवसर प्रदान करते हुए तथा दखल-कब्जा की जाँच करते हुए तीन माह के अन्दर तार्किक आदेश पारित करेंगे। निम्न न्यायालय का अभिलेख सुनवाई हेतु वापस भेजें। वाद की कार्यवाही समाप्त की जाती हैं।   लेखापित एवं संशोधित,       भूमि सुधार उप-समाहत्र्ता,                                                                                                                     भूमि सुधार उप-समाहत्र्ता,           पाकुड़।                                                                                                                                                पाकुड़।  

Digitally Signed by :Rajeev Kumar

Signed Date :11-04-2025 14:41:42

Remarks :case disposed

Time Stamp:11-04-2025 14:51:02