| Admission Date | Order Date | Court Name | Case Number |
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| 04-02-2012 | 16-07-2025 | Additional Collector Pakur | 51 |
यह वाद विद्वान उपायुक्त पाकुड़ के न्यायालय आखएम०पी० याद सं०-08/2002 में दिनांक-30.12.2011 को पारित आदेश द्वारा इस न्यायालय को प्राप्त हुआ है।
मामला संक्षेप में यह है कि पाकुड़ अंचल अन्तर्गत मौजा खपढ़ाजोला के जमाबन्दी सं०-10/31 के दाग सं०-170 एवं 171 अन्तर्गत रकया-01बी०-1900-18पुर भूमि का विपक्षी मास्टर सुन्दर दास के नाम कायम जमाबंदी को रद्द करने एवं लगान रसीद निर्गत करने पर रोक संबंधी एक मामला विज्ञ अनुमंडल पदाधिकारी, पाकुड के न्यायालय में रा०वि० वाद सं०-72/1998-99 चला था। उक्त बाद में दिनाक 24.11.2000 को पारित आदेश द्वारा प्रश्नमत भूमि की कायम जमाबंदी को रद्द करने का प्रस्ताव विद्वान उपायुक्त, पाकुड़ के न्यायालय में भेजा गया। जहाँ से यह वाद इस न्यायालय को सुनवाई एवं निष्पादन हेतु प्राप्त हुआ है।
विपक्षी को प्रस्तुत वाद में सुनवाई / पक्ष रखने हेतु नोटिस निर्गत किया गया। दिनांक-22.02 2025 को श्री संजय कुमार, पिता स्व० मास्टर सुन्दर दास के द्वारा एक आवेदन, शपथ पत्र के साथ दाखिल करते हुए कहा गया कि प्रश्नगत सम्पत्ति बटवारे में अशोक कुमार पिता स्व० दयाल दास एवं विजय कुमार, पिता-गुरमुख दास, सा०-सिन्धीपाड़ा को हिस्से में प्राप्त हुई है। उनके द्वारा वर्तमान दखलकार को नोटिस निर्गत करने का अनुरोध किया गया। वर्तमान दखलकार अशोक कुमार एवं विजय कुमार को नोटिस निर्गत किया गया। अशोक कुमार एवं विजय कुमार न्यायालय में उपस्थित हुए एवं उनके द्वारा कारणपृच्छा दाखिल किया गया।
विपक्षी के विज्ञ अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत पक्ष को सुना गया। विपक्षी द्वारा अपने पक्ष में निम्नांकित कागजात प्रस्तुत किया गया-
01. अनुमंडल पदाधिकारी, पाकुड़ के न्यायालय के रे०मि० वाद सं०-227/1912-13 में दिनाक 28
07.2013 को पारित आदेश की छायाप्रति।
02. सहायक बन्दोबस्त मूर्ति, पाकुड़ के न्यायालय के बन्दोबस्ती वाद्य सं0-40/1928 कुमार ज्ञानेन्द्र चन्द्र पांडे (वादी) बनाम जानकी मांझी प्रोधन एवं अन्य ग्राम खपराजोला में सहायक आदेश की छायाप्रति।
विपक्षी का कहना है कि मौजा खपडाजोला, थाना-पाकुड़ (न०) के जमाबदी सं०-31, दाग सं०-170 एवं 171 तथा अन्य दागों की भूमि बसौड़ी Tenancy के तहत् जी०सी० पाण्डेय के द्वारा वर्ष 1912-13 में Rent Regulation Act, 1886 की धारा 25ए के तहत रैयतों को निर्धारित मुआवजा भुगतान कर अर्जित किया गया था। प्रश्नगत भूमि तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, पाकुड़ के रे०मि० वाद सं0-227/1912-13 के आदेशानुसार अर्जित की गयी। प्रश्नगत भूमि की बन्दोवस्ती अमलनामा के माध्यम से मास्टर सुन्दर दास के साथ भूतपूर्व जमीन्दार के द्वारा की गयी थी। उक्त बन्दोवती दिनांक-0101 1946 के पूर्व की गयी है। BLR Act. 1950 के प्रावधानों के अनुसार 01.01.1948 के पूर्व भूतपूर्व जमीन्दार द्वारा की गयी बन्दोवस्ती को रद्द नहीं किया जा सकता है।
उनका आगे कहना है कि अनुमंडल पदाधिकारी, पाकुड़ के न्यायालय में रे०मिस० वाद सं०-28/1995-96 जिसमें मौजा खपढ़ाजोला के थाना सं०-91, जमाबंदी सं०-31/8 के दाग सं०-162, 163, 165, 311, 319 एवं 320, रकवा-10बी०-0350-10० जमीन की जमाबंदी खारिज करने, रसीद निर्गत नहीं करने का प्रस्ताव अंचल अधिकारी, पाकुड़ से मांगा गया। जिस क्रम में अंचल अधिकारी, पाकुड द्वारा हल्का कर्मचारी/अंचल निरीक्षक से जाँच प्रतिवेदन मांगा गया। हल्का कर्मचारी/अंचल निरीक्षक द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि
01. भौजा-खपडाजोला के जमाबंदी नं0-31 के दाग सं0-162, 163, 165, 311, 319 एवं 320 की जमीन श्री जी० सी० पाण्डेय द्वारा अर्जित की गयी थी, जो वर्ष 1912-13 में Rent regulation Act, 1886 के u/s 25 के तहत् संबंधित रैयतों को समुचित क्षतिपूर्ति देने के उपरात बसीडी Tenency क रुप में अर्जित की गयी थी।
02. उपरोक्त अंकित भूमि अनुमंडल पदाधिकारी, पाकुड़ के राजस्व विविध अभिलेख सं०-227/1912-13 में पारित आदेश के अनुकूल अर्जित की गयी थी।
03. उपायुक्त महोदय के राजस्व विविध वाद सं0-401/1912-13 के द्वारा कुमार जी०सी० पाण्डेय को उपर्युक्त भूमि में पत्थर का व्यापार करने हेतु अनुज्ञप्ति दी गयी थी।
04 वर्ष 1928 में मौजा-खपड़ाजोला के खतियान का अंतिम प्रकाशन हो गया, परंतु तत्कालीन पेशकार श्री उदित नारायण झा के मूल से उक्त विवरण के जमीन का खतियान इन्द्राज कुमार वी०सी० पाण्डेय के नाम से अंकित नहीं कर अनाबादी खाता में अंकित कर दिया गया है।
05. कुमार जी०सी० पाण्डेय के द्वारा उपर्युक्त अंकित दागों के संबंध में अपने नाम से अलग खतियान खोलने के लिए सहायक बन्दोबस्त पदाधिकारी, दुमका के पास आवेदन दिया है।
06. सहायक बन्दोबस्त पदाधिकारी, दुमका ने उनके द्वारा दिये गये आवेदन पर विचार करते हुए एवं उपायुक्त, दुमका के द्वारा पारित आदेश के वास्तविकता के आलोक में अपने बन्दोबस्ती आपत्ति बाद सं0-40/1925 में अनाबादी खाता के अभियुक्ति स्तम्भ में यह अभियुक्ति अंकित करने का आदेश पारित किया कि पुरातन पतित दखल खास मलिक उपायुक्त, दुमका के राजस्व विविध वाद सं0-481/1912-13 जिससे की अन्य रैयतों का अधिकार पूर्णत निष्प्रभावी हो सके। इस आलोक में अंचल अधिकारी, पाकुड़ द्वारा जमाबंदी खारिज करने का प्रस्ताव नहीं दिया गया एवं अग्रिम आदेशार्थ अनुमंडल पदाधिकारी, पाकुड़ को अग्रसारित किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी, पाकुड़ द्वारा आदेश दिनाक 16.06.1995 के द्वारा उपरोक्त प्रतिवेदन / अंचल अधिकारी का प्रस्ताव तथा कागजातों का अवलोकन कर दाग सं0-162, 163, 165, 311, 319 एवं 320 का कुल रकवा-10बी0-0300-10५० भूमि की जमाबंदी खारिज करने संबंधी मागे गये प्रस्ताव को वापस कर लिया गया तथा पूर्व की भांति राजस्व रसीद निर्गत करने का आदेश दिया गया।उनका आगे कहना है कि जमीन्दार द्वारा दिए गए बन्दोवस्ती पट्टा को रद्द किए बिना जमाबन्दी विलोपन किया जाना उचित नहीं है। उनके द्वारा वाद की कार्यवाही समाप्त करने एवं लगान रसीद निर्गत करने का आदेश पारित करने का अनुरोध किया गया। सपूर्ण अभिलेख का अवलोकन एवं ययन किया गया दाखिल कागजातों से स्पष्ट है कि प्रश्नगत भूमि का अर्जन विधिषत किया गया था एवं खतियान में भी आवश्यक संशोधन किया गया है। भूतपूर्व जमीन्दार को भूमि बन्दोवस्ती का अधिकार था।
विपक्षी का दावा है कि उन्हें भूतपूर्व जमीन्दार द्वारा प्रश्नगत भूमि की बन्दोवस्ती की गयी थी। जमीन्दार द्वारा की गयी बन्दोवस्ती को BLR Act. 1950 की धारा-4 (h) के तहत सुनवाई के उपरान्त ही रद किया जा सकता है। जबतक इस संदर्भ में निणर्य नहीं ले लिया जाता तबतक जमाबन्दी विलोपन की कार्यवाही उचित प्रतीत नहीं होता है। सरकार के संयुक्त सचिव, राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, झारखण्ड, राँची के पत्रांक-2884, दिनांक-10.07.2018 के द्वारा दिनांक-03.07.2018 को हुई मंत्री परिषद की बैठक में मद सं0-18 में अन्यान्य के रूप में लिये गए निर्णय का संसूचन प्राप्त है, जिसके अनुसार अवैद्य जमाबन्दी रद्द करने हेतु खोले गये अभिलेखों पर अंतिम आदेश पारित होने तक पूर्व में निर्गत मैनुअल लगान रसीद के आधार पर ऑनलाईन लगान रसीद निर्गत करने की व्यवस्था करने तथा वैसे सभी अन्य मामले जिसमें किसी प्रकार के कार्रवाई के बिना भी लगान रसीद निर्गत किया जाना बाधित है. उन सभी मामलों में भी ऑनलाईन लगान रसीद निर्गत करने का निदेश दिया गया है।
अतः उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में भूमि सुधार उप समाहर्ता, पाकुड़ को आदेश दिया जाता है कि विपक्षी स्व० मास्टर सुन्दर दास को भुतपूर्व जमीन्दार द्वारा दी गयी बन्दोवस्ती पट्टा के संदर्भ में BLR Act. 1950 की धारा-4(h) के तहत कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए संबंधित पक्षकार को सुनवाई का पर्याप्त अवसर प्रदान करते हुए विधि सम्मत आदेश पारित करेंगे। भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, पाकुड़ द्वारा अंतिम आदेश पारित किये जाने तक प्रश्नगत दाग सं0-170 एवं 171 अन्तर्गत रकया-01बी०-1950-18पुर भूमि की विपक्षी के नाम कायम जमाबन्दी को बहाल किया जाता है। अचल अधिकारी, पाकुड तदनुसार प्रश्नगत भूमि का लगान रसीद विपक्षी के नाम निर्गत करना सुनिश्चित करेंगे। भूमि सुधार उप समाहत्तर्ता, पाकुड़ द्वारा धारा 4 (h) के तहत कार्यवाही में पारित आदेश के आलोक में मास्टर सुन्दर दास के नाम से सृजित जमाबन्दी के विलोपन अथवा यथावत बहाल रथाने की कार्रवाई की जायेगी। आदेश की प्रति भूमि सुधार उप समाहर्ता, पाकुड़ एवं अंचल अधिकारी, पाकुड़ को भेजे। वाद की कार्रवाई समाप्त की जाती है।