अभिलेख उपस्थापित प्रस्तुत विविध वाद संख्या 06/2023-24 मनोज कुमार बनाम् लखन मिस्त्री एवं अन्य निवासी ग्राम किसुनपुर, थाना-चतरा, जिला-चतरा की कार्यवाही आवेदक (प्रथम पक्ष) द्वारा प्रस्तुत आवेदन पत्र के आधार पर राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा समर्पित प्रतिवेदन के आलोक में प्रारंभ की गई है। प्रथम पक्ष ने आवेदन दिया है कि राजस्व ग्राम किसनपुर, थाना नं0 185, थाना चतरा के अंदर खाता सं0 89, प्लौट सं0 198 एवं अन्य में कुल रकवा 11.08 एकड़ (ग्यारह एकड़ आठ डिसमिल) भूमि उनके पूर्वज के नाम रैयती दर्ज है और उपायुक्त, हजारीबाग के न्यायालय में दिनांक 07.11.1939 के आदेशानुसार देवी बड़ही, पिता-गोपी बड़ही के नाम उक्त 11.08 एकड़ की जमाबंदी कायम होकर रसीद निर्गत हुई। तदुपरांत विपक्षी सहदेव मिस्त्री, लालधारी मिस्त्री एवं चतुरी मिस्त्री ने गलत ढंग से खतियान के अनुसार एक हिस्सा भूमि अनुसार खाता सं0 89, प्लौट सं0 1114 में 2.77 एकड़ भूमि का अलग जमाबंदी खुलवा लिया। विपक्षीगण द्वारा इसी खाता का प्लौट सं0 1063 में जबरन भूमि पर कब्जा करने हेतु मकान निर्माण किया जा रहा है जिसे तत्काल रोकने की कारवाई की जाय। राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन से ज्ञात होता है कि पंजी प् की पृ0 सं0 174/1 पर प्रथम पक्ष के पूर्वज देवी बड़ही, पिता-गोपी बड़ही के नामखाता सं0 89, प्लौट सं0 198, 388, 586, 668, 739, 1057,1061,1062,1063, 1064,1112,1114 कुल रकवा 6.92 एकड़ की जमाबंदी कायम है और वर्ष 2023-24 तक लगान रसीद निर्गत हुई है। प्रतिवेदन के अनुसार वर्तमान विवादी प्लौट सं0 1063 में 0.54 एकड़ भूमि उक्त जमाबंदी रकवा में सम्मिलित है और प्लौट सं0 1144 में रकवा शून्य दर्ज है। प्रतिवेदन से यह भी स्पष्ट होता है कि विपक्षी/प्रतिपक्षी सहदेव मिस्त्री, ललधारी मिस्त्री एवं चतुरी मिस्त्री, पिता- जीतन मिस्त्री के नाम पंजी प्प् की पृ0सं0 551/1 पर खाता सं0 89,प्लौट 1114, रकवा 1.62 एकड़ भूमि की जमाबंदी दाखिल खारिज केस सं0 47/1975-76 के आदेशानुसार दर्ज की गई और अद्तन रसीद वर्ष 2023-24 तक निर्गत है। सर्वे खतियान के अनुसार खाता सं0 89 गोपी बड़ही, चुल्हन बढ़ई एवं जीतन बढ़ई वगै0 के नाम रैयती दर्ज है। आवेदक के आवेदन अनुसार वर्तमान में प्लौट सं0 1063 पर विपक्षी का अनाधिकृत दावा के कारण विवाद उत्पन्न हुआ है। उभय पक्ष को अपने दावा के समर्थन में कागजात के साथ उपस्थित होकर अपना-अपना पक्ष रखने हेतु नोटिस प्रेषित की गई। उभय पक्ष की ओर से विद्वान् अधिवक्ता द्वारा वकालतनामा के साथ उपस्थिति दर्ज कराया और कागजात दाखिल किए गए है। प्रथम पक्ष के विद्वान अधिवक्ता ने अपना तथ्य पेश किया और एक लिखित जवाब के साथ विवादी भूमि से संबंधित राजस्व कागजात दाखिल किया गया। प्रथम पक्ष द्वारा दाखिल किए गए कागजात निम्नवत् है:-1.) सर्वे खतियान।2.) प्रमाण पत्र वाद सं0 56/1937-38 के आदेशानुसार नीलामी भूमि पर प्रथम पक्ष देवी बढ़ई को प्रदत्त दखल देहानी (क्मसपअमतल व िचवेेमेेपवद) की प्रमाणित प्रति।3.) उपायुक्त, हजारीबाग न्यायालय में निष्पादित त्मदज त्मकनबजपवद केस सं0 247/1939 में पारित आदेश की प्रमाणित प्रति।4.) पंजी प्प् की छाया प्रति।5.) निर्गत की गई लगान रसीदों की प्रति।6.) अनुमंडल दण्डाधिकारी, चतरा के न्यायालय में धारा 144 दं0प्र0सं0 अन्तर्गत निष्पादित वाद सं0 70/2023 में पारित आदेश की छाया प्रति।7.बाईपास रोड़ निर्माण हेतु अधिग्रहित भूमि की मुआवजा राशि का पत्र। प्रतिपक्षी ओर से लखन मिस्त्री द्वारा निम्नांकित कागजात दाखिल किये गये है:-1.) दिनांक 20.06.1941 को निष्पादित अनिबंधित सादा बिक्रय पत्र की छाया प्रति।.2) भू0पू0 जमीन्दार द्वारा निर्गत रसीद।3.) लगान रसीद सं0 081952, दिनांक 9.5.2009 वर्ष 2008-094.) लगान रसीद सं0 ग्/39, 492397 वर्ष 1997-98 5.) लगान रसीद सं0 477312 वर्ष 1963-646.) लगान रसीद सं0 ग्/39 ।। 7404915 वर्ष 2001-02 एवं वर्ष 1991-92, 1978-79, 1996-97, 1998-99 वर्ष 2003-04 वर्ष 1987-887.) अधिकार अभिलेख खाता सं0 89 की छाया प्रति।8.) पंजी प्प् की छाया प्रति। प्रतिपक्षी द्वारा कागजात दाखिल करने के बाद कोई लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया। जबकि उन्हे पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है। प्रथम पक्ष की ओर से दाखिल लिखित जवाब में स्पष्ट किया गया कि राजस्व ग्राम किसुनपुर थाना नं0 185 थाना/जिला चतरा के अंदर खाता सं0 89, प्लौट सं0 1063 की भूमि पर विवाद उत्पन्न हुआ है। जबकि प्रथम पक्ष का स्वामित्व संपूर्ण खाता सं0 89 की कुल रैयती भूमि 11.08 एकड़ पर है। सर्वे रैयत गोपी बढ़ही, पिता मनी बढ़ही दो हिस्सा, चुल्हन बड़ही एक हिस्सा एवं जितन बढ़ही के नाम एक हिस्सा खतियान में दर्ज है। कालांतर में उक्त खाता सं0 89 संपूर्ण भूखंड का प्रमाणपत्र वाद प्रारंभ हुआ और उक्त वाद में अंततः नीलामी केस सं0 56/1937-38 के आदेशानुसार भूमि क्रेता देवी बढ़ही पिता-गोपी बढ़ही के पक्ष में नीलाम पत्र वाद निस्तारित हुआ और उन्हें न्यायालय द्वारा भूमि पर दखल सौप दिया गया। क्मसपअमतल व िचवेेमेपवद दिनांक 01.06.1937 को देवी बढ़ही के पक्ष में दिया गया। तदनुसार जमाबंदी कायम होकर जमीन्दार को लगान भुगतान भू-स्वामी देवी बढही द्वारा किया जाता रहा। बाद में भूमि का धारित लगान की राशि अधिक होने के कारण उपायुक्त, हजारीबाग का न्यायालय में त्मदज त्मकनबजपवद (माल कमी) का केस सं0 247/1939 दायर किया गया। उक्त वाद की सुनवाई के पश्चात् 51.93: लगान कमी (त्मकनबम) कर आवेदक केपूर्वज देवी बढ़ही के पक्ष में आदेश पारित किया गया। इस प्रकार खाता सं0 89 की 11.08 एकड़ भूमि पर संपूर्ण मालिकाना हक देवी बढ़ही को प्राप्त हुआ। प्रथम पक्ष द्वारा प्रस्तुत भू-अर्जन कार्यालय, चतरा द्वारा मुआवजा केस सं0 03/2010-11 में चतरा बाईपास रोड निर्माण हेतु अधिग्रहित भूखण्ड की मुआवजा राशि प्लौट सं0 388, (अंश भाग), प्लौट सं0 1057 (अंश) प्लौट सं0 1061, प्लौट सं0 1062 (अंश) प्लौट सं0 1063 (अंश) प्लौट सं0 1064 (अंश) की भूमि की मुआवजा राशि का भुगतान प्रथम पक्ष के परिवारिक सदस्यों को किया गया है। उक्त कार्यवाही से भी स्पष्ट है कि भूमि पर स्मामित्व प्रथम पक्ष का ही बनता है। आगे बताया गया है कि प्रतिपक्षी सर्वे रैयत चुल्हन बढ़ही से वर्ष 1941 में सादा केवाला के माध्यम से भूमि क्रय करने का दावा पेश कर रहे है जो पूर्णतः निराधार और विधि के प्रतिकूल है। भू-सम्पदा हस्तांतरण अधिनियम की धारा 54 के का उल्लेख करते हुए उक्त भू-हस्तांतरण अवैघ है। प्रथम पक्ष द्वारा आगे बताया गया है कि प्रतिपक्षी न उपर्युक्त सादा केवाला के आधार पर खाता सं0 89, प्लौट सं0 1114 में 2.77 एकड़ भूमि की जमाबंदी बिना किसी सक्षम पदाधिकारी के आदेशानुसार खोल दी गई जो स्वतः संदेहास्पद और रद्द करने योग्य है। प्रथम पक्ष ने प्रतिपक्षी द्वारा प्रश्नगत भूमि से संबंधित दाखिल किए गए लगान रसीदों को जाली एवं बनावटी बताते हुए रसीदों की जांच एवं सत्यापन करने हेतु अनुरोध किया। इसी क्रम में सूचना अधिकार के तहत कार्यालय द्वारा प्रदत सूचना का उल्लेख किया गया है। उक्त सूचना अनुसार प्रतिपक्षी लखनमिस्त्री के पिता सहदेव बढ़ई के नाम वर्ष 83-84 से 84-85 के लिए निर्गत लगान सं0 ग्/15-563894, वर्ष 97-98 ग्/39 -492397, वर्ष 98-99 ग्/39- 509408 एवं वर्ष 2002-2003 से 2003-04 श्रछ/39 3250214 अंचल कर्यालय चतरा में उपलब्ध लगान रसीद भंडार पंजी के आमद (त्मबमपचज) नहीं दर्ज किया गया है और न ही इन रसीदो को राजस्व कर्मचारी को लगान संग्रहण कार्य के लिए निर्गत ही किया गया है। उक्त आधार पर प्रतिपक्षी द्वारा दाखिल किये गए लगान रसीद स्वतः फर्जी सिद्ध हो रहा है। दूसरी ओर आवेदक द्वारा दाखिल किये गये दस्तावेज स्वतः सही सिद्ध होता है।
अतः उपरोक्त तथ्यों, विवेचनों, राजस्व उप निरीक्षक/अंचल निरीक्षक के जांच प्रतिवेदन/राजस्व अभिलेखों/कागजातों, तथ्यों तथा उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं द्वारा पेश किये गये तर्को/पक्षों व दाखिल दस्तावेजों के आलोक में आवेदक प्रथम पक्ष का आवेदन स्वीकृत किया जाता है चूंकि प्रथम पक्ष का स्वामित्व की पुष्टी होती है। प्रतिपक्षी के दावा एवं प्रस्तुत कागजात का कोई प्रमाणित एवं ठोस आधार स्पष्ट नहीं होता है। अतः प्रतिपक्षी का दावा खारिज किया जाता है। विपक्षीगण अपने स्वत्व (हक-हकियत) निर्धारण हेतु सक्षम न्यायालय , व्यवहार न्यायालय में जाने हेतु स्वतंत्र है। वाद निष्पादित ।
लेखापित एवं संशोधित,ं अंचल अधिकारी चतरा।